Saturday, November 7, 2009

Thursday, December 4, 2008

मुंबई का दर्द.....

जख्मों के निशां तो बाकी रहेंगे....
हुआ है बहुत बार ऐसा, जख्म सीने पर लग हैं,
आगे भी होगा कई बार।
कोई गफलत का मारा, सिरफिरा आयेगा और दिल पर घाव देकर चला जाएगा।
लोग आएंगे आंसू बहाएंगे, कुछ फूल, कुछ रोशनियां, कुछ शब्दों की श्रद्धांजलियां देकर चले जाएंगे।
हर बार की तरह इस बार भी वक्त भर देगा मेरे सीने के जख्म।
पर इन जख्मों के निशान फिर भी बाकी रह जाएंगे।
कौन बताएगा, किससे जाकर पूछूं
क्यों बार-बार मुझे बनाया जाता रहा है निशाना,
चलाई जाती हैं गोलियां मेरी ही छाती पर,
किये जाते हैं धमाके मेरे ही आंगन में
और बहाया जाता है मेरे ही बच्चों का खून।
कौन बतायेगा मुझे कब रुकेगा ये अंतहीन सिलसिला,
कब सोएंगे मेरे बच्चे चैन की नींद।
किसके करुं फरियाद, कि बचाओ मुझे,
मत खेलो ऐसे खूनी खेल, जिसमें खो जाएं अपने ही, अपने ही आंगन में
कब तक देखूं अपने ही बच्चों का खून।
जब घर की रक्षक ही बनने लगे घर का भक्षक,
जब आंसू बहाने के होने लगा बार-बार दिखावा,
तो फिर किससे लगाऊं आस।
दर्द अब सहा जाता नहीं इंतिहा हो गई,
कोई आए और बताए मुझे कब रुकेगा ये खूनी खेल,
कब बंद होगा यह अंतहीन घावों के लगने का सिलसिला.........
कोई तो बताए मुझे...

Sunday, November 30, 2008

आखो में नमी, दिल में दर्द और .....

कितनी जाने , कितना डर, कितना खौफ, कितना दर्द, कितने आंसू, कुछ भी हिसाब नही इनका। मुंबई की ये काली रात कुछ ज्यादा ही लम्बी हो गयी थी और लगता था की अब शायाद कभी सुबह ही नही होगी। पर हर बार की हमारे देश की अजेय सेना और उसके बहादुर जवानों ने आते ही लोगो को भरोसा दिलाया की घबराओ नही 'हम है ना ' अब सब कुछ ठीक हो जाएगा। सेना को देखते ही लोगो को भी दिलासा मिली की अब सब ठीक हो जाएगा। पूरे ६० घंटे बिना थके, बिना रुके, बिना खाए, बिना सोये और बिना अपनी जान की परवाह किए लड़ते रहे हमारे ये वीर बहादुर जवान। और जब जीत ली जंग तो जो खुशी का हुजूम दिखा, उसे देखने के बाद शायद ही ऐसा कोई हो जिसके मन में अपने देश और अपने देश की सेना के लिए गर्व न रह हो। जब भारत माता की जय, वन्देमातरम और जो हिन्दुस्तान से टकराएगा चूर चूर हो जाएगा के नारे लगाये गए, अपने बहादुर सैनिको को छूने की चाहत, उन्हें देखने की चाहत और उन्हें बधाई देने का उन्माद देख कर हर भारतीय की छाती चौडी हो गई। हालाँकि मिशन मुंबई की आज़ादी में हमारे २० बहादुरों को अपनी जान गवानी पड़ी। और जब इनकी अन्तिम यात्रा निकली तो हर देशवासी की आँखों में नमी उतर आयी। हर भारतीय का दिल रो रहा था। लेकिन साथ ही इन वीर सपूतो पर नाज़ भी था। अब जब ये काली रात गुजर गयी है, और कुछ दिनों के बाद सब कुछ नोर्मल हो जाएगा, जब एक बार फिर मुंबई वापस अपनी पूरी रफ़्तार से दौड़ने लगेगी तो कही ऐसा न हो की हम और आप इनकी कुर्बानी को भूल जाए। जब कभी भी ऐसा लगने लगे की जिंदगी की रात कुछ ज्यादा ही काली हो रही है, देश में कहीं कुछ अच्छा नही हो रहा, और हर ओर सिर्फ़ निराशा ही निराशा है तो एक बार इन वीरो को जरूर याद कर ले , ये निश्चित ही एक बार फ़िर आप को निराशा की अँधेरी रातो से बाहर निकाल लायेगे । इन सबसे ऊँचे कद के लोगो के बारे में लिखने के लिए मुझे शब्द नही मिल पा रहे पर मई सिर्फ़ इतना ही कह सकता हूँ,
आखो में नमी दिल में दर्द ,जुबा खामोश कर गए तुम। कुछ ऐसा कर गए तुम की चाह कर भी न भूल पायेगे, जब भी दिल में होगी कोई खुशी बहुत याद आयेगे आप। तुम्हे आखरी सलाम।

किसका करे शुक्रिया अदा

६० घंटो की लंबी लडाई, २० जवानो की शहादत, १८३ मौते, २२ विदेशियो की कुर्बानी, भारत की नाक झुकने के बाद, सरकार की नींद टूट गई। देश के गृह मंत्री को त्यागपत्र देने पर मजबूर करने के साथ ही, ४ बड़े शहरों में कमांडो फाॅर्स का गठन, और संप्रग की अध्यक्ष सोनिया गाँधी का कठोर रूख , सरकार को कड़ी करवाई करने का निर्देश देना जैसी घटनाएं तो यही दिखाती है। पर दोस्तों सावधान ये कांग्रेस की राजनीतिक चाल भी हो सकती है, इन नेताओ की चमड़ी बहती मोटी होती है। जरा गौर कीजिये, पाटिल का इस्तीफा शनिवार को ही ले लिया गया था पर कांग्रेस ने इसे ओपन किया रविवार को। आखिर क्यो , क्योंकि कांग्रेस बार बार एक नाकाम गृहमंत्री के आरोपों को झेल रही थी, और उसे महसूस हो रहा था की एक साल में तेरह धमाको में ४०० लोगो की जान जाने और अरबो की सम्पति के नुक्सान के बाद भी पाटिल साहब की कार्य प्रणाली में बदलाव नही आया। वो हमेसा ही एक सॉफ्ट लुक, साफ़ सफाई वाले और नरम रूख वाले गृह मानती ही बने रहे। हर बार कड़ी करवाई करने का बयान देने वाले बयान बहादुर कभी भी इस पर अमल नही कर पाए। उनकी इन्ही कमजोरियों की वजह से कांग्रेस आलाकमान समेत सभी को लगने लगा की कही ऐसा न हो की पाटिल की वजह से आगामी चुनावी खेल न बिगड़ जाए.बीजेपी तो बीजेपी ,सपा, बसपा समेत आम जनता को भी अब जवाब देना मुश्किल हो रहा था, इसी लिए युद्ध के कुशल रणनीतिकार की तरह राजा को बचाने के लिए सिपाही को कुर्बान कर दिया। खैर कुछ भी हो जनता ने रहात की साँस तो ली ही है। हमारी और से भी धन्यवाद सोनिया जी, धन्यवाद मनमोहन जी, धन्यवाद पाटिल सर ।

Thursday, November 27, 2008

कहा है राज ...

अभी तक मराठियों के हमदर्द , बिहारियों और उत्तर भारतीयों के ऊपर मराठी मानुस के नाम पर हमले करने वाले राज ठाकरे अब किस जगह जा का छुप गए है। बुधवार की रात से लगातार मुंबई के सीने पर पाकिस्तानी हमलावर गोली दाग रहे है, राज और बाला साहेब के मराठी मानुसो की जान ले रहे है तब कहा है मराठी मानुस के हितैसी। अभी तक नौकरी और व्यार्पार करने वाले, मुंबई को मुंबई बनाने वाले सीधे साधे उत्तर प्रदेश, बिहार और दुसरे प्रदेशों के लोगो को बेहरहमी से पीटने वाले राज और उनके मनसे के लोगो कहना है। जागो राज तुम्हरे मराठी लोगो को पाकिस्तानी आतंकी मार रहे है जागो न। आओ सामने और बचाओ महारास्त्र को। अपने देश को तोड़ने की कोशिश तो बहुत की अब देश बचने के लिए भी आगे आओ, देश न सही महारास्त्र को बचाओ, मराठियों को बचाओ। यु न छूपे रहो। निकलो घर के बाहर और लोहा लो.

Wednesday, November 26, 2008

कुछ कहो...

कुछ तो कहो, देखो यु चुप न रहो। कुछ तो मन की परते खोलो बहुत हो चुकी ये चुप्पी अब तोड़ डालो, जो दबी है दिल में उन भावनाओ को निकालो बहार। हसरतो को दो परवाज़ की मन की है ऊँची उड़ान,की तोड़ो हर बंधन। दिल की बातो को ऐसे छुपाओ नही, उठो अब बहुत हो चुका ये रोना धोना , आया है वक्त इक भरो इतनी ऊँची उड़ान, रह जाए सारे पीछे। तुम हो सबसे बेहतर दिखा दो पुरी दुनिया को। की नही चलेगा तुम्हरे बिना इस संसार का काम , तुम ही तो हो इसकी आस। मत डुबो निरासा में है बहुत काम करने बाकि। उठो और जुट जाओ ।

Friday, November 14, 2008

दर्द और अँधेरा

दर्द और अंधेरे का बड़ा गहरा रिश्ता होता है, जब आप कामयाब होते हो तब आपको इस शिखर से नीचे आने का डर लगा रहता है। और फ़िर किसी दिन आप नीचे आ जाते हो टीबी आप को दर्द होता है, और आपके चारो ओर अँधेरा होता है, आप इससे निकलना चाहते हो। आईजे ऐसा ही कुछ हुआ भारतीय क्रिकेटर युवराज के साथ। एक टाइम था जब वो स्टार हुआ करते थे, पर उन्होंने अपनी कामयाबी हो सम्भानले की उतने कोशिश नही की जितनी करनी चाहिए। और उनको टीम से बहार कर दिया गया। तब वो रास रंग में डूबे थे। इस लिए अपने खेल पर ध्यान नही दे पाये। इंडिया ऑस्ट्रेलिया सिरीज में ० पर आउट होते ही उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। पर इंडिया इंग्लैंड सीरिज में १३८ रनों के विशालतम स्कोर तक पहुँच कर युवी ने ख़ुद को साबित कर दिया। यंहा दिलचस्प यह है की आज उनकी कमर में भीषण दर्द भी था पर मन के अंधरे ने इस दर्द को भुला दिया। और युवी ने एक शानदार पारी खेल कर अपने अंधरे से दर्द पर काबू पाया और फिर उस मुकाम तक पहुचे जिस जगह पर पहले थे। ' 'सो दर्द को पी ले साकी की कोई मंजिल तेरे इंतज़ार में बैठी है। उस अंधेरे से ख़ुद पर पा विजय की ये उजाले की पुकार है।'' मुबारक हो युवी.

Sunday, November 9, 2008

सौरव गांगुली, बंगाल का शेर या कहो दादा। नाम अनेक पर काम एक। सिर्फ़ और सिर्फ़ क्रिकेट। नागपुर टेस्ट के बाद बंगाल के इस शेर के बल्ले से इंडियन टीम के लिए रनों की दहाड़ बंद हो जायेगी। दादा ने ऑस्ट्रेलिया इंडिया सीरिज के बाद संन्यास लेने का एलान कर दिया है, दादा ने जो देसी क्रिकेट को दिया है वो शायद ही कोई और दे सके। दादा ने देसी क्रिकेट को आक्रामकता, और जुझारूपन देने का और विपक्षी टीम पर भारी पड़ने की कला सिखाई। भला इंडिया और इंग्लैंड सीरिज में टी शर्ट लहराने का कमाल कोई और नही कर पाया। कपिल देव के बाद दादा ने ही सिर्फ़ जुझारू और अपने दम पर मैच जितना सिर्फ़ दादा के ही बस का बात थी। दादा ने जब वापसी के बाद भी कमाल का प्रदर्शन किया और आलोचकों का मुंच बंद कर दिया। दादा तुम्हारे बाद तुम्हरी कमी मेरे साथ ही पुरे देश को खलेगी, दादा तुजे सलाम।

Saturday, November 8, 2008

देशद्रोही या देशभक्त

बापू महात्मा गाँधी, सरदार पटेल, भगत सिंह और सुभाष चन्द्र बोस ने ये कभी नही कहा की हम उत्तर भारत के है या पश्चिम भारत के उन सभी ने हमेशा यही कहा की हमसब भारतीय है और एक है। हो सकता है संवाद कुछ और हो, पर है एकदम अन्दर तक हिला देने वाले। ये डायलाग है फ़िल्म देशद्रोही के। फ़िल्म में कुछ जाने तो कुछ अनजाने चेहर जरूर है, पर है एकदम दमदार फ़िल्म। निर्देशक नया है, कमाल खान, निर्माता नया है कमाल खान, और हीरो नया है कमाल खान यानि कमाल ने दिखाया है अपना कमाल। ये फ़िल्म एक ऐसे वक्त में आ रही है जब मुंबई में राज ठाकरे की मनसे के कुछ बंद अकाललोग उत्तर भारतीयों और बिहारियों को महाराष्ट्र और विशेषकर मुंबई से भर निकलने पर तुले है। अब ये कमाल की व्यापारिक दिमाग का कमाल कहे या राज और मनसे के लोगो को आइना दिखाने की नियत की इतनी अच्छी फ़िल्म बना डाली। कम से कम टीवी प्रोमो देख कर तो एक पर फ़िल्म देखने थियेटर में जाने का मन करता ही है, फ़िल्म देख कर ही शायद कुछ समझा जाए। फ़िल्म का नाम जरूर देशद्रोही है पर ये जगती है देशभक्ति।